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Nobel Hygiene

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राज सुबह के समय बाथरूम में था, जब उसने कुछ अजीब देखा। उसके पेशाब में हलके-हलके झाग थे, जो पहले कभी नहीं दिखे थे। शुरू में उसने सोचा कि शायद यह पानी की गति की वजह से हो रहा है, लेकिन यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रही। साथ ही, उसके चेहरे पर भी हल्की सूजन आ गई थी, जिसे वह थकान का नतीजा समझ रहा था। जब राज ने इस बारे में अपने डॉक्टर मित्र से बात की, तो उसने गंभीरता से कहा कि यह यूरिन में प्रोटीन आने के लक्षण हो सकते हैं।

राज की कहानी उन हजारों लोगों जैसी है, जो इन शुरुआती संकेतों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। यूरिन में प्रोटीन आना, शरीर का एक संकेत है कि किडनी में कोई समस्या शुरू हो रही है। अगर इसे समय रहते पहचान लिया जाए, तो इलाज संभव है। लेकिन अगर इसे नज़रअंदाज़ किया जाए, तो यह किडनी की गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है।

इस लेख में हम जानेंगे कि यूरिन में प्रोटीन आना आयुर्वेदिक इलाज से किस तरह ठीक किया जा सकता है। आयुर्वेद में ऐसी कई जड़ी-बूटियां और उपचार विधियाँ हैं, जो न केवल इस समस्या को जड़ से ठीक करने में मदद करती हैं, बल्कि आपकी किडनी को भी प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रखती हैं।

यूरिन में प्रोटीन आना (Proteinuria) क्या है?

हमारी किडनी सामान्य रूप से खून को फ़िल्टर करके उसमें मौजूद वेस्ट पदार्थों को यूरिन के रूप में बाहर निकालती है। लेकिन जब किडनी की फ़िल्टरिंग क्षमता कम होने लगती है, तो खून में मौजूद प्रोटीन भी यूरिन के साथ बाहर आने लगता है। इसे मेडिकल भाषा में प्रोटीन्यूरिया (Proteinuria) या 'urine mein protein aana' कहा जाता है।

यह स्वयं में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि किसी अंदरूनी समस्या का संकेत है। इसलिए अगर ऐसे कोई लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से तुरंत परामर्श लेना चाहिए। क्योंकि यह आमतौर पर किडनी और लीवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का संकेत होता है, जिनका समय रहते इलाज ज़रूरी है।

यह भी पढ़ें: पीला पेशाब क्यों आता है और क्या है पीला पेशाब का घरेलू इलाज?

प्रोटीन यूरिया के कारण

यूरिन में प्रोटीन आना कई वजहों से हो सकता है, और हर व्यक्ति में इसके कारण अलग-अलग हो सकते हैं। आइए इन्हें विस्तार से जानते हैं:

  • किडनी की बीमारी (जैसे Nephrotic Syndrome या Chronic Kidney Disease)

  • हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज

  • इम्यून सिस्टम डिसऑर्डर (जैसे लूपस)

  • अत्यधिक प्रोटीन डाइट या ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़

  • डिहाइड्रेशन और बुखार

इसका सबसे बड़ा खतरा यह है कि शुरुआत में इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं, जिन्हें समझना ज़रूरी है। इसलिए सलाह दी जाती है कि साल में कम से कम एक बार फुल बॉडी चेकअप ज़रूर कराएं, ताकि किसी भी संभावित समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।

यूरिन में प्रोटीन आने के लक्षण को नज़रअंदाज़ करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि यह धीरे-धीरे किडनी को डैमेज कर सकता है। समय रहते इलाज न मिलने पर स्थिति इतनी बिगड़ सकती है कि डायलिसिस की ज़रूरत पड़ जाए, और कई मामलों में जान का भी ख़तरा हो सकता है।

इसलिए अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • यूरिन का झागदार होना

  • टखनों, चेहरे या आंखों के नीचे सूजन

  • लगातार थकान और कमजोरी

  • बार-बार पेशाब आना

  • भूख में कमी महसूस होना

अगर आप इन लक्षणों को अनुभव करें, तो फौरन डॉक्टर से सलाह लें और इसके साथ-साथ यूरिन में प्रोटीन आना आयुर्वेदिक इलाज के विकल्पों के बारे में भी जानें, जो किडनी की सेहत को सुरक्षित और प्राकृतिक रूप से बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं।

यूरिन में प्रोटीन आना आयुर्वेदिक इलाज

यूरिन में प्रोटीन आना आयुर्वेदिक इलाज न केवल किडनी की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है, बल्कि शरीर में संतुलन भी बहाल करता है। यहाँ कुछ असरदार और पारंपरिक आयुर्वेदिक उपाय बताए जा रहे हैं, जो इस समस्या में लाभकारी माने जाते हैं:

1. गोक्शुर और वरुण: ये दोनों जड़ी-बूटियाँ मूत्र प्रणाली को सुदृढ़ करती हैं और किडनी को डिटॉक्स करने में सहायक होती हैं। गोक्शुर मूत्र को साफ करने में मदद करता है और साथ ही मूत्र में प्रोटीन की वृद्धि जैसी समस्याओं में भी लाभ प्रदान करता है।

2. पुनर्नवा: यह एक प्रभावी मूत्रवर्धक औषधि है, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों और अतिरिक्त जल को बाहर निकालने में मदद करती है। इसके साथ ही यह किडनी की सूजन को भी कम करती है।

3. नीरगुंडी और त्रिफला: त्रिफला शरीर की सफाई करती है और मल-मूत्र से जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित करती है, जबकि नीरगुंडी दर्द और सूजन को कम करने में मदद करती है।

4. अश्वगंधा और शतावरी: दोनों ही स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले टॉनिक हैं, जो शरीर की स्वाभाविक उपचार क्षमताओं को बढ़ाते हैं।

5. घरेलू उपायों और आयुर्वेदिक काढ़े से प्राप्त लाभ: घरेलू उपायों और आयुर्वेदिक काढ़ों से भी यूरिन में प्रोटीन आने की समस्या में राहत मिल सकती है। रातभर भिगोए हुए धनिए का पानी किडनी की सफाई में मदद करता है। वहीं, तुलसी के एंटीबैक्टीरियल गुण किडनी को संक्रमण से सुरक्षित रखते हैं और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। ये आसान उपाय किडनी की सेहत बेहतर करने में सहायक होते हैं।

इसके साथ ही आयुर्वेदिक पंचकर्म थैरेपी, विशेष रूप से वमन और विरेचन उपचार, इन उपायों के साथ मिलकर यूरिन में प्रोटीन आना जैसी समस्या को रोकने और किडनी की कार्यक्षमता को बेहतर करने में प्रभावी माने जाते हैं।

यह भी पढ़ें: बार-बार पेशाब आना: आयुर्वेदिक इलाज

निष्कर्ष

आयुर्वेदिक उपचार के ज़रिए यूरिन में प्रोटीन की मात्रा को समय रहते संतुलित किया जा सकता है। यदि शरीर के स्वरूप (वात, पित्त, कफ) के अनुसार उचित चिकित्सा और जीवनशैली में बदलाव किया जाए, तो यूरिन में प्रोटीन आना आयुर्वेदिक इलाज से संभव है। ध्यान दें कि आयुर्वेद सिर्फ एक उपचार पद्धति नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली को अपनाने का सिद्धांत है, जो आपको भीतर से सशक्त बनाता है।

आयुर्वेदिक इलाज के साथ-साथ पेशाब संबंधी देखभाल में साफ और सुरक्षित प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी ज़रूरी है। फ्रेंड्स प्रीमियम एडल्ट ड्राई पैंट्स लंबे समय तक सूखापन, एंटी-बैक्टीरियल सुरक्षा और आरामदायक फिट प्रदान करते हैं। बेहतर देखभाल के लिए अभी ऑर्डर करें।


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प्रायः पूछे जाने वाले सवाल

1. यूरिन में प्रोटीन क्यों आता है?

मुख्य रूप से यह किडनी की समस्याओं, डायबिटीज़, उच्च रक्तदाब, पानी की कमी और अत्यधिक प्रोटीन के सेवन के कारण होता है।

2. प्रोटीन यूरिया में क्या खाना चाहिए?

इसमें कम प्रोटीन, कम नमक और कम पोटेशियम वाला आहार अपनाना चाहिए। ताजे फल, उबली हुई सब्ज़ियां, धनिए का पानी और ग्रीन टी अच्छे विकल्प माने जाते हैं।

3. क्या योग से भी लाभ हो सकता है?

हाँ, प्राणायाम, कपालभाति और भुजंगासन जैसे योगाभ्यास किडनी के स्वास्थ्य में सुधार करने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद कर सकते हैं।

4. कितने समय में इलाज से सुधार आता है?

यह व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है, लेकिन नियमित आयुर्वेदिक इलाज और जीवनशैली में बदलाव के ज़रिए 4–8 सप्ताह में सुधार देखा जा सकता है।

5. प्रोटीन यूरिया पूरी तरह ठीक हो सकता है?

यदि समस्या बहुत गंभीर न हो और समय रहते इलाज शुरू कर दिया जाए, तो आयुर्वेदिक उपायों और नियमित देखभाल से इसे पूरी तरह कंट्रोल और ठीक किया जा सकता है।

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