परिचय
आज के इस बदलाव वाले दौर में जहां खान-पान का किसी को होश नहीं है, वही मानो शुगर एक आम सी बीमारी हो गई है। इंडिया में 18 वर्ष से ऊपर के लगभग 77 मिलियन लोग डायबीटिक हैं। वहीं लगभग 25 मिलियन लोग प्री-डायबीटिक हैं। ऐसे में शुगर लेवल चार्ट को समझना ज़रूरी हो जाता है। शुगर भले ही लोगों को आम बीमारी लगे, पर ये कई बार काफी खतरनाक और जानलेवा भी साबित हो सकती हैं। हालांकि ये बीमारी रातों रात नहीं होती, पर हमारा लाइफस्टाइल, डाइट, और रोजमर्रा का तनाव इसके पीछे की वजह हो सकते हैं।
डायबिटीज हमारे शरीर के ग्लूकोस लेवल को बैलेंस करने की क्षमता को प्रभावित करता है। शुगर लेवल ऊपर नीचे होने से आपके शरीर में असर पड़ सकता है। कमज़ोरी, थकान, सिरदर्द, तेज़ धड़कन, मुंह सूखना, ज्यादा भूख लगना, बार-बार पेशाब लगना, और जोडों का दर्द, शुगर लेवल के इंबैलेंस होने के कुछ संकेत हैं। शुगर लेवल को संतुलन में रखने के लिए हमें शुगर लेवल चार्ट को समझना ज़रूरी है।
नॉर्मल शुगर लेवल
चाहे आप प्री-डायबीटिक हो, आपको शुगर हो, आपके परिवार में किसी को शुगर हो, या आप डायबिटीज से कोसो दूर हो, फिर भी आपको ये जानना ज़रूरी है की नॉर्मल शुगर लेवल कितनी होनी चाहिए?
शुगर लेवल चार्ट जानने से पहले ये जान लें, की नॉर्मल शुगर लेवल आपकी उम्र, लाइफस्टाइल, और अन्य बीमारियों पर निर्भर करता है। मुख्य रूप से ये आपकी उम्र पे निर्भर करेगा।
शुगर लेवल चार्ट
ये शुगर लेवल चार्ट बताएगा कि आपकी उम्र के हिसाब से शुगर लेवल कितना होना चाहिए?
| आयु | फास्टिंग ब्लड शुगर | खाने से पहले शुगर लेवल | खाने के 1-2 घंटे बाद शुगर लेवल | सोते समय शुगर लेवल |
|---|---|---|---|---|
| 6 साल से कम | 80 - 180 mg/dL | 100 - 180 mg/dL | 180 mg/dL | 110 - 200 mg/dL |
| 6-12 साल | 80 - 180 mg/dL | 90 - 180 mg/dL | 140 mg/dL | 100 - 180 mg/dL |
| 13-19 साल | 70 - 150 mg/dL | 90 - 130 mg/dL | 140 mg/dL | 90 - 150 mg/dL |
| 20-39 साल | 70 - 100 mg/dL | 70 - 130 mg/dL | 180 mg/dL से कम | 180 mg/dL से कम |
| 40 से ज्यादा | 90 - 130 mg/dL | 140 mg/dL | 150 mg/dL | 150 mg/dL |
A1C एक माप (measure) है जो आपके पिछले 3 महीने की ब्लड शुगर लेवल की औसत (average) को दर्शाता है। इस A1C शुगर लेवल चार्ट से आप पता लगा सकते है की नॉर्मल A1C कितना होना चाहिए साथ ही ये प्री-डायबीटिक और डायबीटिक होने के संकेत भी देता है।
| निदान (Diagnosis) | A1C % |
|---|---|
| नॉर्मल A1C | 5.7% से कम |
| प्री-डायबीटिक | 5.7% से 6.5% |
| डायबिटीज | 6.5% से ज्यादा |
हाई और लो शुगर लेवल के लक्षण
शुगर लेवल का ऊपर या नीचे जाना शरीर में कई तरह के बदलाव लेकर आता है। कई बार ये बदलाव धीरे-धीरे होते हैं, इसलिए शुरुआत में समझ नहीं आता कि वजह क्या है। हाई शुगर होने पर अक्सर बार-बार प्यास लगती है, पेशाब ज़्यादा आता है और मुँह सूखा रहने लगता है। कुछ लोगों को बिना ज़्यादा मेहनत के भी बहुत थकान महसूस होती है या नज़र धुंधली लगने लगती है। छोटी-मोटी चोट या घाव का देर से भरना भी हाई शुगर का संकेत हो सकता है।
वहीं, लो शुगर होने पर शरीर अचानक कमज़ोर महसूस करने लगता है। चक्कर आना, ज़्यादा पसीना आना, हाथ-पैर काँपना या अचानक बहुत ज़्यादा भूख लगना इसके आम संकेत हैं। कई बार घबराहट, बेचैनी या ध्यान न लग पाने जैसी दिक्कतें भी होने लगती हैं।
अक्सर लोग इन लक्षणों को थकान या तनाव समझकर टाल देते हैं। लेकिन अगर ये संकेत बार-बार सामने आ रहे हैं या रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करने लगे हैं, तो इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। शरीर पहले ही बता देता है कि उसे मदद या बदलाव की ज़रूरत है।
उम्र के अनुसार सामान्य रक्त शर्करा का स्तर
रक्त शर्करा का “नॉर्मल” स्तर हर किसी के लिए बिल्कुल एक जैसा नहीं होता। यह आपकी उम्र, आपकी सेहत और जांच किस समय हुई है, इन सब पर निर्भर करता है। आमतौर पर खाली पेट की शुगर 70 से 99 mg/dL के बीच मानी जाती है और खाने के दो घंटे बाद 140 mg/dL से कम होना सामान्य माना जाता है।
बुज़ुर्गों में डॉक्टर कभी-कभी बहुत सख़्त रेंज रखने के बजाय थोड़ा लचीलापन रखते हैं, क्योंकि बहुत कम शुगर लेवल उनके लिए ज़्यादा ख़तरनाक हो सकता है। वहीं, बच्चों और युवाओं में भी शुगर का स्तर शरीर की ज़रूरतों और एक्टिविटी के अनुसार थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकता है।
यह ज़रूरी है कि आप केवल रिपोर्ट देखकर खुद से घबराएँ नहीं। आपकी उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और लाइफस्टाइल को देखते हुए डॉक्टर ही सही तरीके से बता सकते हैं कि आपके लिए कौन-सा शुगर लेवल सुरक्षित और संतुलित माना जाएगा।
रक्त शर्करा के स्तर को कौन से कारक प्रभावित करते हैं? (H2)
शुगर लेवल सिर्फ मीठा खाने से ही नहीं बदलता। आपके रोज़मर्रा के कई छोटे-बड़े फैसले इस पर असर डालते हैं। आप क्या खाते हैं, कितनी मात्रा में खाते हैं, और कितने समय पर खाते हैं, ये सब शुगर लेवल को प्रभावित करता है। इसके अलावा शारीरिक गतिविधि की कमी, ठीक से नींद न लेना और लगातार तनाव में रहना भी शुगर को असंतुलित कर सकता है।
कई बार लोग दवा समय पर न लेने या पानी कम पीने की वजह से भी शुगर में उतार-चढ़ाव महसूस करते हैं। किसी तरह की बीमारी या संक्रमण होने पर भी शरीर की शुगर कंट्रोल करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
अगर आप पूरी कोशिश कर रहे हैं फिर भी शुगर ऊपर-नीचे हो रही है, तो खुद को दोष देने की ज़रूरत नहीं है। हर शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। ज़रूरी यह है कि आप अपने शरीर के पैटर्न को समझें और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेकर छोटे-छोटे बदलाव करें।
खतरनाक शुगर लेवल
नॉर्मल शुगर लेवल 80 से 130 mg/dL के बीच होता है। अगर ये 240 mg/dL या उससे ऊपर चला जाए तो ये खतरनाक हो सकता है।
पेशाब में शुगर की जांच
पेशाब से शुगर की पहचान हो सकती है। आप सोच रहे होंगे कैसे? पेशाब में शुगर के लक्षण हैं, पेशाब के रंग में बदलाव। अगर पेशाब का रंग हल्का भूरा या पीला है तो ये डायबिटीज के लक्षण हो सकते है।
ऐसा इसीलिए होता है क्यूंकि डायबिटीज का सीधा असर हमारी किडनी पर होता है जिसकी वजह से शरीर में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है और पेशाब का रंग बदलने लगता है।
एक डायबीटिक पेशेंट को बार-बार पेशाब आ सकती है। ये कई बार आपको संकोच में डाल सकता है, इसका सरल उपाय है -Friends adult diaper. ये डायपर्स आपको लीकेज, मूत्र दाग, और असहजता से निपटने में मदद करते हैं। यह आपको शर्मिंदगी के बिना अपने जीवन को सामान्य रूप से जीने भी देता है।
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निष्कर्ष
शुगर लेवल चार्ट कि समझ उतनी ही ज़रूरी है जितना की एक अच्छा लाइफस्टाइल मेंटेन करना। कुछ जानकारी जैसे - नॉर्मल शुगर लेवल क्या होता है और उम्र के हिसाब से शुगर लेवल कितना होना चाहिए? समझ लेना बेहतर है। ये आपको सुरक्षित रखेगा और शुगर से बचने में मदद करेगा। अगर आप प्री-डायबीटिक हैं, तो आप कुछ सावधानियां बरतकर डायबिटीज को मात दे सकते हैं। डायबिटीज के बारे में अधिक जानकारी के लिए ये पढ़ें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. नॉर्मल शुगर लेवल कितना होता है?
अलग -अलग उम्र का शुगर लेवल अलग होता है, और ये शुगर लेवल चार्ट देखने पर समझ आता है।
2. नॉर्मल शुगर कितनी होनी चाहिए?
18 वर्ष के ऊपर की उम्र के लोगों के लिए नॉर्मल शुगर लेवल 80 से 130 mg/dL होती है।
3. क्या 200 ब्लड शुगर, खाने के बाद नॉर्मल है?
नहीं, किसी भी उम्र के लिए, डायबीटिक या नॉन डायबीटिक व्यक्ति के लिए 200 ब्लड शुगर बहुत ज्यादा है। ये हाइ ब्लड शुगर का संकेत है।
4. तुरंत शुगर कम करने के लिए क्या करें?
शुगर रातों रात नहीं होती, ना ही खत्म हो सकती है, इसीलिए तुरंत इसको ठीक या कम करना मुमकिन नहीं है। हालांकि शुगर कम करने के लिए आप दालचीनी, अलसी के बीज, मेथी दाने, और करेले का सेवन कर सकते हैं।
5. शुगर बढ़ने पर क्या महसूस होता है?
शुगर बढ़ने के लक्षण है, अधिक पेशाब, थकान, ज्यादा प्यास, अधिक भूख, चक्कर आना, घाव का धीमा भरना, त्वचा की समस्या, वजन का कम होना, इत्यादि।
6. 250 शुगर होने पर क्या करें?
अगर ब्लड शुगर लेवल 250 के आसपास पहुँच जाए, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। उस समय बहुत मीठा या भारी खाना टालना बेहतर होता है और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहना मददगार हो सकता है। सबसे ज़रूरी है कि आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि यह समझा जा सके कि शुगर क्यों बढ़ रही है और दवा या डाइट में किसी बदलाव की ज़रूरत है या नहीं।
7. 3 महीने का शुगर लेवल कितना होना चाहिए?
तीन महीने का औसत शुगर लेवल HbA1c टेस्ट से पता चलता है। आमतौर पर 5.7% से कम का स्तर सामान्य माना जाता है। डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों के लिए डॉक्टर उनकी स्थिति, उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित लक्ष्य तय करते हैं। इसलिए अपनी रिपोर्ट का सही मतलब समझने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।
8. उम्र के हिसाब से शुगर लेवल कितना होना चाहिए?
शुगर लेवल की सामान्य रेंज उम्र के साथ बहुत ज़्यादा नहीं बदलती, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ शरीर लो शुगर को उतनी आसानी से संभाल नहीं पाता। इसलिए बुज़ुर्गों में बहुत कम शुगर लेवल से बचना अधिक ज़रूरी होता है। आपके लिए सही शुगर रेंज क्या होनी चाहिए, यह आपकी उम्र, दवाइयों और समग्र स्वास्थ्य को देखकर डॉक्टर ही बेहतर तरीके से तय कर सकते हैं